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श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
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Shri Ram Janmabhoomi Temple Workshop Ayodhya

श्री राम जन्मभूमि मंदिर कार्यशाला

जय श्रीराम

About Shri Ram Janmabhoomi Temple Workshop

Shri Ram Janmabhoomi Temple Workshop in ayodhya

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Shri Ram Janmabhoomi Temple Workshop

जय श्री राम ||

राम जन्मभूमि परिसर में भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है और इसके दिसंबर 2023 तक बनकर तैयार हो जाने का अनुमान है व मंदिर में जनवरी 2024 (मकर संक्राति) तक भगवान राम लला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हो जाने की संभावना है.

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि कार्यशाला में पत्थर तराशने का कार्य 1992 से चल रहा है. अभी तक मंदिर निर्माण के लिए पिलर्स पर नक्काशी का कार्य लगभग पूरा हो गया है. छत के पत्थरों को तराशने का कार्य भी काफी हद तक हो चुका है. अब पिलर्स को आपस में जोड़ने के लिए बीम के पत्थरों पर नक्काशी का कार्य रामकारसेवक पुरम में शुरू हो गया है. पहली बार इसके लिए राजस्थान के साथ यूपी के कारीगरों को भी लगाया गया है. वहीं श्री रामजन्मभूमि परिसर में तीन दिवसीय यज्ञ का शुभारम्भ भी हो चुका है.

The stone carving work is going on since 1992 in the construction of Shri Ram Janmabhoomi in Ayodhya. Till now the construction work on the pillars for the construction of the temple is almost completed. The work of carving the roof wires has also been done to a large extent. Now the construction work on the beam straps to connect the pillars to you has started at Ramkarsevak Puram. For the first time artists from above Rajasthan have also been engaged for this. At the same time, the three-day yagya also begins in the Shri Ram Janmabhoomi complex.

राम मंदिर कितना बन चुका है

राम मंदिर का निर्माण कार्य कब शुरू हुआ : बताया जाता है कि सिंकदर लोदी के शासनकाल के दौरान भी भव्य राममंदिर था। 14वीं शताब्दी के बाद मुगलों का अधिकार हो गया और 1527-28 के दौरान भव्य राममंदिर को तोड़कर उसकी जगह मस्जिद बना दी गई। इसके बाद 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर निर्माण का कार्य फिर से शुरू हुआ।

अयोध्या में राम मंदिर का 50 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है. 2024 में राम मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी है. कहा तो ये भी जा रहा है कि अगले साल दिसंबर तक मंदिर का ग्राउंड फ्लोर तैयार कर दिया जाएगा. कुल भूमि 67 एकड़ है। लेकिन, मंदिर 2 एकड़ में ही बनेगा। बाकी 65 एकड़ की जमीन पर राम मंदिर परिसर का विस्तार किया जाएगा।

हजारों वर्षों तक कायम रहेगी भव्यता :

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी बताते हैं कि, मंदिर निर्माण अपने समय अवधि पर चल रहा है. दिसंबर 23 तक मंदिर के गर्भ गृह का कार्य पूरा हो जाएगा और जनवरी 2024 मकर संक्रांति के दिन भगवान राम लला अपने गर्भ गृह में विराजमान होंगे उसके साथ ही मंदिर का और भी निर्माण चलता रहेगा. साथ ही साथ जानकारी देते हुए कैंप कार्यालय प्रभारी ने बताया कि, मंदिर निर्माण में वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. निर्माण सामग्री ऐसी लगाई जा रही है जिससे मंदिर हजारों वर्षों तक वैसे का वैसा बना रहे उसकी भव्यता बरकरार रहे.

When did the construction work of Ram Mandir start : It is said that there was a grand Ram Mandir even during the reign of Sikandar Lodi. After the 14th century, the Mughals took over and during 1527-28 the grand Ram temple was demolished and replaced by a mosque. After this, on 5 August 2020, the work of construction of Ram temple started again.

50 percent construction work of Ram temple in Ayodhya has been completed. In 2024, preparations are on to open the Ram temple for devotees. It is also being said that the ground floor of the temple will be ready by December next year. The total land is 67 acres. But, the temple will be built in 2 acres only. The Ram temple complex will be expanded on the remaining 65 acres of land.

Grandeur will last for thousands of years :

Camp office in-charge of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust says that the temple construction is going on as per its time period. By December 23, the work of the sanctum sanctorum of the temple will be completed and on January 2024, on the day of Makar Sankranti, Lord Ram Lala will sit in his sanctum sanctorum, along with that the construction of the temple will continue. While giving the information, the in-charge of the camp office said that scientific technology is being used in the construction of the temple. The construction material is being installed in such a way that the temple remains as it was for thousands of years and its grandeur remains intact.


Temple 🔗

The Ram Mandir Trust has set December 2023 as the deadline and the temple will be open for devotees from January 2024.

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Places To See In Ayodhya 🔗

The top attractions to visit in Ayodhya are: Shri Ram Janma Bhoomi, Hanuman Garhi Mandir, Kanak Bhavan Temple, Sita Ki Rasoi

Facts and History of Ayodhya And Ramayana

केवट कौन था

केवट का संबंध भोईवंश से था और मल्लाह का काम किया करता था. रामायण में केवट का वर्णन प्रमुखता से किया गया है. केचव ने प्रभु श्रीराम को वनवास के दौरान माता सीता और लक्ष्मण के साथ अपने नाव में बिठा कर गंगा पार करवाया था. रामायण के अयोध्याकाण्ड में इस प्रसंग का बहुत खूबसूरत ढंग से वर्णन किया गया है.

केवट पूर्वजन्म में कौन थे - केवट, वाल्मीकि रामायण के पात्र हैं। जिन्होंने प्रभ श्रीराम, सीता और लक्ष्मण जी को नदी पार करवाई थी। अयोध्या कांड में केवट के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। कहते हैं सृष्टि के आरंभ में केवट का जन्म जब हुआ था, तब धरती जलमग्न थी। वह एक कछुए के रूप में जन्में थे। और उस रूप में वह श्रीहरि के अमिट भक्त थे। तब उस कछुए ने मोक्ष पाने की हार्दिक इच्छा के साथ विष्णु जी के अंगूठे के स्पर्श की असफल कोशिश की थी। इस घटना के बाद केवट ने अपने पूर्वजन्म यानी कछुए के रूप में कई वर्षों तक तप किया। भगवान ने उसके तप को देखते हुए केवट को मानव योनि दी। तब वह केवट के रूप में जन्मा, जिन्होंने प्रभु राम, सीता और लक्ष्मण को नदी पार करवाई थी।

Kevat was related to Bhoivansh and used to work as a boatman. Kevat has been prominently described in Ramayana. Kechav had crossed the Ganges by making Lord Shri Ram sit in his boat along with Mother Sita and Lakshman during his exile. This incident has been beautifully described in the Ayodhya Kand of Ramayana.

Who was Kevat in his previous birth - Kevat is the character of Valmiki Ramayana. The one who made Prabha Shri Ram, Sita and Lakshman ji cross the river. Kevat has been described in detail in the Ayodhya scandal. It is said that when Kevat was born in the beginning of the creation, the earth was submerged. He was born as a tortoise. And in that form he was an ardent devotee of Sri Hari. Then that tortoise unsuccessfully tried to touch Vishnu ji's thumb with a heartfelt desire to get salvation. After this incident, Kevat meditated for many years in the form of his previous birth i.e. Tortoise. Seeing his tenacity, God gave human vagina to Kevat. Then he was born as Kevat, who helped Lord Rama, Sita and Lakshmana cross the river.

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Dasharatha - दशरथ

दशरथ एक महान और प्रसिद्ध राजा थे, जो त्रेतायुग में आये। वे कोसल राजवंश के अंतर्गत राजा थे। दशरथ का जन्म अयोध्या नगर में हुआ। उनके माता-पिता का नाम ऋष्यरेखा और श्रृंगर था। दशरथ की माता ऋष्यरेखा उनके पिता की दूसरी पत्नी थीं। दशरथ की प्रथम पत्नी का नाम कौशल्या था, जो उनकी पत्नी के रूप में सदैव निर्देशक और सहायक थी।

दशरथ का रंग गहरे मिटटी के बराबर सुनहरा था, और उनके बाल मध्यम लंबाई के साथ काले थे। वे बहुत ही शक्तिशाली और ब्राह्मण गुणों से युक्त थे। दशरथ धर्मिक और सामर्थ्यपूर्ण शासक थे, जो अपने राज्य की अच्छी तरह से देखभाल करते थे। वे एक मानवीय राजा थे जिन्होंने न्याय, सच्चाई और धर्म को अपना मूल मंत्र बनाया था।

दशरथ के विद्यालयी शिक्षा का स्तर बहुत ऊँचा था। वे वेद, पुराण और धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान रखते थे। उन्होंने सभी धर्मों को समान दृष्टि से स्वीकार किया और अपने राज्य की न्यायिक प्रणाली को न्यायपूर्ण और उच्चतम मानकों पर स्थापित किया।

दशरथ एक सामर्थ्यशाली सेनापति भी थे। वे बड़े ही साहसी और पराक्रमी योद्धा थे, जो अपने शत्रुओं को हरा देने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उन्होंने अपनी सेना के साथ कई महत्वपूर्ण युद्धों में भाग लिया और वीरता से वापस आए। दशरथ की सेना का नागरिकों के द्वारा बहुत सम्मान किया जाता था और उन्हें उनके साहस और समर्पण के लिए प्रशंसा मिलती थी।

दशरथ एक आदर्श पिता भी थे। वे अपने तीन पुत्रों को बहुत प्रेम करते थे और उन्हें सबकुछ प्रदान करने के लिए तत्पर रहते थे। दशरथ के पुत्रों के नाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न थे। वे सभी धर्मात्मा और धर्म के पुजारी थे। दशरथ के प्रति उनके पुत्रों का आदर बहुत गहरा था और वे उनके उच्च संस्कारों को सीखते थे।

दशरथ एक सच्चे और वचनबद्ध दोस्त भी थे। वे अपने मित्रों की सहायता करने में निपुण थे और उन्हें हमेशा समर्थन देते थे। उनकी मित्रता और संगठनशीलता के कारण वे अपने देश में बड़े ही प्रसिद्ध थे।

दशरथ एक सामरिक कला के प्रेमी भी थे। वे धनुर्विद्या और आयुध शस्त्रों में माहिर थे और युद्ध कला के उदात्त संगीत का भी ज्ञान रखते थे। उन्हें शास्त्रों की गहरी ज्ञान थी और वे अपने शिष्यों को भी शिक्षा देते थे। उनकी सामरिक कला में निपुणता के कारण वे आदर्श योद्धा माने जाते थे।

दशरथ एक सामर्थ्यशाली और दायालु राजा थे। वे अपने राज्य के लोगों के प्रति मानवीयता और सद्भावना का पालन करते थे। दशरथ अपने लोगों के लिए निरंतर विकास की योजनाएं बनाते और सुनिश्चित करते थे। वे अपने राज्य की संपत्ति को न्यायपूर्ण और सामर्थ्यपूर्ण तरीके से व्यय करते थे।

एक शांतिप्रिय और धर्माचार्य राजा के रूप में, दशरथ को अपने पुत्र राम के विवाह के लिए स्वयंवर आयोजित करना पड़ा। उन्होंने संपूर्ण राज्य को आमंत्रित किया और अपने राजमहल में एक विशाल सभा स्थापित की। दशरथ के स्वयंवर में विभिन्न राज्यों के राजकुमारों ने भाग लिया और राम ने सीता का चयन किया, जो बाद में उनकी पत्नी बनी।

दशरथ के बारे में कहा जाता है कि वे एक विद्वान्, धर्मात्मा, धैर्यशाली और सदैव न्यायप्रिय राजा थे। उनकी प्रशासनिक क्षमता और वीरता के कारण वे अपने समय के मशहूर और प्रमुख राजाओं में गिने जाते थे। दशरथ की मृत्यु ने राजवंश को भारी नुकसान पहुंचाया और उनके निधन के बाद उनके पुत्र राम को अयोध्या का राजा बनाया गया। दशरथ की साधुपन्थी और न्यायप्रिय व्यक्तित्व ने उन्हें देश और विदेश में विख्यात बनाया।



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|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

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2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

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रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

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अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.