×

जय श्री राम 🙏

सादर आमंत्रण

🕊 Exclusive First Look: Majestic Ram Mandir in Ayodhya Unveiled! 🕊

🕊 एक्सक्लूसिव फर्स्ट लुक: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का अनावरण! 🕊

YouTube Logo
श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
लाइव दर्शन | Live Darshan
×
YouTube Logo

Post Blog

The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : रावण वध। मन्दोदरी विभीषण का विलाप।

रामायण : Episode 75

रावण वध। मन्दोदरी विभीषण का विलाप।

राम रावण के बीच भयंकर युद्ध होता है। राम बारम्बार अपने तीखे बाणों से रावण का शीश काटते हैं किन्तु हर बार उसके धड़ पर नया शीश उग आता जाता है। देवराज इन्द्र यह विचित्र स्थिति देखकर कहते हैं कि प्रभु राम रावण के वक्ष पर बाण क्यों नहीं चलाते। इसपर भगवान ब्रह्मा गूढ़ रहस्य बताते हैं कि राम कभी रावण के हृदय को लक्ष्य करके बाण नहीं चलायेंगे क्योंकि वे जानते हैं कि रावण के हृदय में सीता का वास है, सीता के हृदय में राम का वास है और राम के हृदय में पूरी सृष्टि का वास है। इस अवस्था में यदि रावण के हृदय में बाण मारा गया तो उसके साथ सीता, स्वयं राम और पूरी सृष्टि का विनाश हो जायेगा। ब्रह्मा कहते हैं कि राम रावण का सिर बार बार काट कर उसे विचलित कर रहे हैं। इस तरह रावण का ध्यान विचलित हुआ तो उसके हृदय से सीता का लोप होगा, उसी क्षण राम रावण का हृदय भेदन करेंगे। उधर राम की निरन्तर विफलता देखकर विभीषण उनके पास पहुँचते हैं और बताते हैं कि भगवान ब्रह्मा के वरदान से रावण की नाभि में अमृत है। राम अग्निबाण का संधान कर रावण की नाभि को भेदते हैं और उसका अमृत सुखा देते हैं। सारथि मातलि कहता है कि देवताओे ने रावण के विनाश का जो समय बताया था, वह आ चुका है। अब राम ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर रावण का अन्त करें। राम रावण पर ब्रह्मास्त्र चलाते हैं। रावण धरती पर आ गिरता है। प्राण छोड़ते समय पहली बार वह अपने मुख से राम को श्रीराम कहकर पुकराता है। तीनों लोक राम की जय जयकार करते हैं। राम अपनी यह जीत विभीषण और पूरी वानर सेना को समर्पित करते हैं। रावण की आत्मा परमात्मा में विलीन होती है। विभीषण बड़े भाई रावण के शव के पास बैठकर विलाप करते हैं। वह अपने भाई की मौत का कारण बनने के लिये पश्चाताप करते हैं और लक्ष्मण से कहते हैं कि अपने बाण से वे उनके प्राण भी हर लें। राम विभीषण को सांत्वना देते हैं और कहते हैं कि रावण ने रण में मृत्यु पाकर परमगति पायी है। पटरानी मन्दोदरी और रानी धन्यमालिनी भी वहाँ आकर रावण के शव पर विलाप करती हैं। मन्दोदरी विभीषण को भ्रातद्रोह के लिये धिक्कारती है। तभी नाना माल्यवान लंका का राजमुकुट व राजसी तलवार लेकर वहाँ पहुँचते हैं और लंका पर अयोध्या की आधीनता स्वीकार करते हुए राम से आम प्रजा पर कोप न करने की प्रार्थना करते हैं। राम माल्यवान से कहते हैं कि लंका पर लंकावासियों का ही आधिपत्य रहेगा। उन्होंने रावण के अधर्म का नाश करने के लिये यह युद्ध किया था। राम विभीषण को लंकापति बनाने की घोषणा दोहराते हैं। वह विभीषण से अपने बड़े भाई रावण का अन्तिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने को कहते हैं। राम रावण को श्रद्धांजलि अर्पित कर एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Kumbhakarna - कुम्भकर्ण

कुम्भकर्ण एक प्रमुख पाताल लोक का राक्षस है जो 'रामायण' के महाकाव्य में महत्वपूर्ण रोल निभाता है। वह रावण के भाई थे और शुरपणखा, खर, दूषण, विभीषण और मेघनाद का भी बड़ा भाई थे। कुम्भकर्ण का नाम 'कुम्भ' और 'कर्ण' से मिलकर बना है, जो उनके विशाल और शक्तिशाली कानों को दर्शाता है। उनका शरीर भी विशाल और बलशाली होता है, जिसे स्वर्णमय रंग में वर्णित किया गया है। वे एक बहुत बड़े वनमार्ग में वास करते थे और अपने भयानक रूप के कारण लोग उन्हें डरावना मानते थे।

कुम्भकर्ण अत्यंत भूखा और प्यासा राक्षस था। उनकी भूख इतनी थी कि उन्हें रोज़ाना हज़ारों मांस खाने की आवश्यकता होती थी। वह अपनी बड़ी और शक्तिशाली मानसिकता के कारण रावण के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते थे। युद्ध के समय उनकी शक्ति और सामर्थ्य का प्रमाण दिखाया जाता है जब वे श्रीराम के सैन्यसमूह को भयभीत करने के लिए एक अद्भुत मारने वाली साधना का उपयोग करते हैं।

कुम्भकर्ण एक दिन बिना सोते ही जीवन बिताने वाले राक्षस थे। उन्हें बार-बार जागना होता था, क्योंकि उनकी नींद केवल एक दिन के लिए होती थी। उनकी नींद को तोड़कर भी बस वे सभी नामधारी और भयभीत होते थे।

कुम्भकर्ण का महत्वपूर्ण संबंध रामायण के लंका युद्ध के समय होता है। श्रीराम और उनके भक्तों का लक्ष्मण ने उन्हें मारने का निश्चय किया। लक्ष्मण ने एक दुर्गम और मजबूत सभ्यता उपयोग करके उन्हें हराने का प्रयास किया। लेकिन कुम्भकर्ण की भयंकरता और उनकी अद्भुत शक्ति ने उन्हें अच्छी तरह से सजग रखा। इसके बावजूद, लक्ष्मण ने बाण चलाकर उन्हें मार दिया और उनकी मृत्यु हो गई।

कुम्भकर्ण को एक पुरानी प्रतिज्ञा के कारण अवश्य पूछा जाना चाहिए। किंतु यह भी सत्य है कि वे अपनी बड़ी और दुःखद भूल की वजह से रावण के साथ ठंडे में नहीं रह सकते थे। उन्होंने श्रीराम के द्वारा मारे जाने की प्रतिज्ञा भी ली थी, जिसका वे पालन करते हुए लंका युद्ध में लड़े।

कुम्भकर्ण का चरित्र रामायण के महानायकों के चरित्र से बिल्कुल अलग है। वे बुद्धिमान नहीं थे, लेकिन उनका भाई विभीषण उन्हें एक विद्वान और बुद्धिमान बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कभी-कभी अपनी मतभेदों के कारण रावण के साथ तकरार की, लेकिन उनकी श्रद्धा और अनुयायी स्वभाव ने उन्हें हमेशा लंका के प्रमुख राक्षस के रूप में बनाए रखा।

आमतौर पर, कुम्भकर्ण को कठिनाईयों का प्रतीक और अपरिहार्य दुष्प्रभावी शक्ति के प्रतीक के रूप में दिखाया जाता है। उनकी प्रतिभा को नियंत्रित करने में उन्हें विफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने रामायण के कई प्रमुख पलों में आपूर्ति दी। उनकी प्रतिभा और बल ने उन्हें एक महत्वपूर्ण चरित्र बनाया है, जो रामायण के युद्ध के पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण रोल निभाता है।

कुम्भकर्ण एक राक्षस के रूप में भयानक और प्रभावी थे, लेकिन उनकी अन्तरात्मा में एक मनःपूर्वक और आदर्शवादी पुरुष छुपा था। वे राक्षसों के बारे में ज्ञानी और संवेदनशील थे और इसलिए रामायण के प्रमुख पात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संबंध देखने को मिलता है।

यद्यपि कुम्भकर्ण का भूमिका रामायण के कहानी में संक्षेप में है, लेकिन उनका महत्व विस्तृत रूप से प्रकट होता है। उनकी भयानक सौंदर्यता, अद्भुत शक्ति, और मनोहारी विचारधारा ने उन्हें एक प्रमुख चरित्र बनाया है, जिसका प्रभाव रामायण के प्रमुख घटनाओं पर दिखाई देता है।



Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Sanskrit shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Hindi shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner English shlok

|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

ram mandir ayodhya news feed banner
2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

ram mandir ayodhya news feed banner
रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

ram mandir ayodhya news feed banner
अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.