×

जय श्री राम 🙏

सादर आमंत्रण

🕊 Exclusive First Look: Majestic Ram Mandir in Ayodhya Unveiled! 🕊

🕊 एक्सक्लूसिव फर्स्ट लुक: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का अनावरण! 🕊

YouTube Logo
श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
लाइव दर्शन | Live Darshan
×
YouTube Logo

Post Blog

The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : रावण का कुम्भकरण वियोग । अतिकाय का लक्ष्मण को ललकारना । नरान्तक देवान्तक मृत्यु ।

रामायण : Episode 63

रावण का कुम्भकरण वियोग । अतिकाय का लक्ष्मण को ललकारना । नरान्तक देवान्तक मृत्यु ।

युद्धभूमि में कुम्भकरण के मारे जाने के समाचार पर रावण को सहज विश्वास नहीं होता। काफी देर बाद वह मानता है कि उसका भाई धराशाही हो चुका है। वह कहता है कि आज उसकी दायीं भुजा कट गयी। रावण को आभास होने लगता है कि अब असुर जाति के अन्त का समय आ गया है। तब मेघनाद आगे बढ़कर पिता को सांत्वना देते हुए कहता है कि किसी योद्धा से मारे जाने से देश नहीं हारता। छोटा पुत्र अतिकाय भी कहता है कि उनके पिता के रहते हुए लंका अपराजेय है। एक अन्य पुत्र देवांतक कहता है कि वो राम को मारकर रामांतक कहलाना चाहता है। रावण और उसकी छोटी रानी धन्यमालिनी के चार पुत्र अतिकाय, देवांतक, नरांतक और त्रिशिरा युद्ध में जाने की आज्ञा लेते हैं। उधर युद्धभूमि में विभीषण शोकग्रस्त हैं। वह स्वयं को भाई कुम्भकरण की मृत्यु का दोषी मानते हैं। राम उन्हें जीवात्मा के नश्वर होने और शोक त्यागने का उपदेश देते हैं। राम कुम्भकरण की मौत को वीरगति का गौरव देते हैं। अशोक वाटिका में त्रिजटा सीता को कुम्भकरण के मारे जाने का समाचार देती है। सीता प्रसन्न होती हैं लेकिन रावण के चार पुत्रों के एक साथ युद्ध में जाने की सूचना पर वे माता जगदम्बा से सदा अपने पति राम के दाहिने रहने की प्रार्थना करती हैं। रणभेरी बजती है। अतिकाय अपना दूत राम के पास भेजकर कहलाता है कि जिस प्रकार उनके पिता अपने भाई की मौत पर शोकग्रस्त है, उसी प्रकार वो लक्ष्मण को मारकर राम को भ्रातशोक देना चाहता है। राम लक्ष्मण को युद्ध के लिये भेजते हैं। विभीषण लक्ष्मण को सचेत करते हैं कि अतिकाय कुम्भकरण से सवाया बड़ा लड़ाका है। वह बताते हैं कि एक बार भगवान शिव ने क्रोधित होकर अतिकाय पर अपने त्रिशूल से प्रहार किया था लेकिन उसने त्रिशूल तोड़कर शिवजी का मान भंग कर दिया। इससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे धनुर्विद्या के तमाम रहस्य सिखाए थे। विभीषण एक और प्रसंग सुनाते हैं। आदिकाल में मधु और कैटभ नामक दो असुरों ने बैकुण्ठ में घुसकर क्षीरसागर पर चढ़ाई कर दी। भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी दोनों असुरों का कुछ नहीं बिगाड़ पाया। अहंकार में आकर मधु कैटभ ने विष्णु से वरदान माँगने को कहा। भगवान विष्णु ने वरदान में मधु और कैटभ से उनकी मृत्यु का उपाय पूछ लिया। मधु कैटभ ने दम्भ में आकर कहा कि वे उनके जाँघ पर ही मरेंगे। तब भगवान विष्णु ने अपना आकार बड़ा करके अपनी जाँघों के बीच दोनों असुरों को फँसाकर मार डाला। वही पराक्रमी मधु इस जन्म में कुम्भकरण बन कर पैदा हुआ और ब्रह्मा से अभेद्य कवच पाने वाला ही अतिकाय है। इस पर राम कहते हैं कि विभीषण लक्ष्मण के असली स्वरूप को नहीं जानते हैं, इसलिये वे उनको रोक रहे हैं। लक्ष्मण बड़े भाई राम की प्रदक्षिणा करके रणभूमि में जाते हैं। लक्ष्मण और अतिकाय के बीच ललकारपूर्ण संवाद होता है। उधर अंगद अपनी गदा प्रहारों से नरांतक और हनुमान देवांतक का अन्त कर देते हैं।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Ahilya - अहिल्या

अहिल्या रामायण में एक प्रमुख पात्र है जिसकी विदाई कहानी अत्यंत रोमांचक है। वह एक राजमहिला थी जो अपनी शानदार सुंदरता के लिए मशहूर थी। अहिल्या को भगवान गौतम ऋषि की पत्नी के रूप में जाना जाता है। वह एकमात्र राजमहिला थी जिसने अपने आप को विधवा का दर्जा दिया था जब उनके पति की मृत्यु हो गई।

अहिल्या ने राजमहल की दीर्घ विरासत को सुरक्षित रखा था और उनके राजसभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह धर्म, संस्कृति और कला के दृष्टिकोण से महान थीं और उनके राज्य के लोग उन्हें प्रेम और सम्मान से देखते थे। उनका व्यक्तित्व गर्व, सहानुभूति और सद्भावना से भरा हुआ था। उन्होंने जीवन के धन्य और निर्मल उदाहरण स्थापित किए थे और अपनी अद्भुत साहसिक कथाएं सुनाई थीं। वे अपने दरबार में न्याय के प्रतीक थे और लोगों के आदर्श हीरो थे।

हालांकि, अहिल्या की खूबसूरती और प्रभावशाली व्यक्तित्व के पीछे एक गहरा रहस्य छिपा था। वह एक दिन गौतम ऋषि के आश्रम में जाने का निर्णय लिया, जहां उन्हें अपनी मातृभाषा, तत्त्वज्ञान और ध्यान की ज्ञान प्राप्त होती है। यह आश्रम एक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान था जहां ऋषियों और तपस्वियों का आवास था।

अहिल्या ऋषि गौतम के पास पहुंची और उन्हें धर्माचार्य के रूप में पूजा करने की निवेदन की। ऋषि गौतम, अहिल्या के प्रश्नों का उत्तर देते हुए, ध्यान के माध्यम से उनके मन में निर्मलता के लिए प्रकाश डालने की विधि सिखाते हैं।

एक दिन, अहिल्या भगवान गौतम की कड़ी तपस्या को बहुत ही अभिभूत होकर, उन्हें मोहित करने का प्रयास करती हैं। ध्यान के माध्यम से, ऋषि गौतम सभी आंतरिक बाधाओं को पहचानते हैं और जानते हैं कि अहिल्या की मनमानी और आत्मविश्वास का कारण उसकी शानदार सुंदरता है।

गौतम ऋषि की प्रतिक्रिया में, वे अहिल्या को शाप देते हैं कि वह पत्नी रूप से असह्य दोषों में रहेगी और केवल भगवान राम के संदेश से ही मुक्ति पा सकेगी। वे भगवान राम से विनती करते हैं कि वह अहिल्या को शाप से मुक्त करें।

अहिल्या का जीवन एक समय से बदल जाता है। वह तपस्विनी बनती है, जो अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगती है और नई आदर्शों की प्राप्ति के लिए प्रयास करती है। भगवान राम उनके सामर्थ्य, साहस और परिश्रम को देखकर विश्वास रखते हैं और अहिल्या को शाप से मुक्त करते हैं।

अहिल्या अपने नये जीवन को ग्रहण करती हैं और वह भगवान राम के साथ जुड़कर मानवता के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण बनती हैं। उनकी कथा एक प्रेरणादायक संदेश देती है कि चाहे हम जैसे भी हों, हमें हमारे अवगुणों के साथ समझौता नहीं करना चाहिए और हमेशा सत्य, धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलना चाहिए।

अहिल्या रामायण का एक महत्वपूर्ण और आदर्श पात्र है जो भगवान राम के जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रकट होती है। उनकी कहानी हमें उत्कृष्टता, ध्यान, और साहस की महत्ता को समझाती है और हमें सिखाती है कि कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद, हम अपने अवगुणों को सच्चाई, प्रेम और परम धर्म के साथ समाप्त कर सकते हैं।



Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Sanskrit shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Hindi shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner English shlok

|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

ram mandir ayodhya news feed banner
2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

ram mandir ayodhya news feed banner
रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

ram mandir ayodhya news feed banner
अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.