×

जय श्री राम 🙏

सादर आमंत्रण

🕊 Exclusive First Look: Majestic Ram Mandir in Ayodhya Unveiled! 🕊

🕊 एक्सक्लूसिव फर्स्ट लुक: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का अनावरण! 🕊

YouTube Logo
श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
लाइव दर्शन | Live Darshan
×
YouTube Logo

Post Blog

The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : हनुमान द्वारा द्रोणागिरी पर्वत को उठा लाना। लक्ष्मण की मूर्च्छा भंग।

रामायण : Episode 69

हनुमान द्वारा द्रोणागिरी पर्वत को उठा लाना। लक्ष्मण की मूर्च्छा भंग।

रावण के भेजे मायावी असुर कालनेमि के जाल में फँसकर हनुमान सरोवर में स्नान करने हेतु उतरते हैं। एक मगरमच्छ हनुमान पर हमला करता है। हनुमान उसे मुख से फाड़कर मार देते हैं। मृत मगरमच्छ से एक देवकन्या प्रकट होती है जो ऋषि श्रापवश मगरमच्छ बन गयी थी। देवकन्या हनुमान को भेद देती है कि साधुवेश में कालनेमि नामक मायावी असुर उन्हें मार डालने के इरादे से आया है। हनुमान कालनेमि का वध कर देते हैं और अपने यात्रा पथ पर आगे बढ़ते हैं। हनुमान हिमालय के एक भाग द्रोणगिरी पर जगमग प्रकाश देखकर वहाँ उतरते हैं। यह प्रकाश दिव्य औषधियों का था किन्तु किसी आगन्तुक को आता पाकर औषधियाँ लुप्त हो जाती हैं। हनुमान दिव्य औषधियों के अदृश्य संरक्षक को अपना परिचय देते हैं और अपने आने का प्रयोजन बताते हैं। तब अदृश्य देवता उनके समक्ष प्रकट होकर हनुमान को औषधि ले जाने की अनुमति देते हैं। दिव्य औषधियाँ पुनः प्रकाशमान होती हैं किन्तु हनुमान पहचान नहीं पाते कि इनमें से मृतसंजीवनी बूटी कौन सी है। तब हनुमान बिना एक पल भी व्यर्थ गवाएं, पूरा द्रोणागिरी पर्वत को उठा ले जाने का निर्णय लेते हैं। हनुमान द्रोणागिरी पर्वत समेत आकाश मार्ग से वापस लौट रहे थे, उनके मार्ग में अयोध्या नगरी पड़ती है। अयोध्या के प्रहारी भरत को सूचना देते हैं कि कोई बड़ी आफत उनके नगर के ऊपर मण्डरा रही है। भरत हनुमान को कोई निशाचर समझते हैं और उस पर बाण चला देते हैं। बाण लगते ही हनुमान धरती पर आ गिरते हैं। हनुमान पीड़ा में राम का स्मरण करते हैं। उनके मुख से राम का नाम सुनकर भरत उन्हें चेतना में लाते हैं। हनुमान को जब यह ज्ञात होता है कि उनके समक्ष उनके प्रभु के अनुज भ्राता भरत खड़े हैं तो वे काफी भाव विह्वल होते हैं। भरत हनुमान से भाई राम लक्ष्मण और भाभी सीता की कुशलक्षेम पूछते हैं। हनुमान बिलखते हुए उन्हें पूरी बात बताते हैं। भरत स्तब्ध होते हैं फिर कुछ सम्भल कर हनुमान से कहते हैं कि वह उनके शक्ति बाण पर बैठ जायें, वह उन्हें कुछ देर में लंका पहुँचा देंगे। किन्तु हनुमान कहते हैं कि राम नाम की शक्ति से वह स्वयं सूर्योदय से पहले लंका पहुँच जायेंगे। हनुमान विशालरूप् धारण कर पुनः द्रोणागिरी पर्वत के साथ लंका को प्रस्थान करते हैं। भरत को पश्चाताप होता है कि उनके कारण ही उनके भाईयों को ये दारुण दुःख सहने पड़ रहे हैं। उधर राम रात्रि बीतने जाने के साथ लक्ष्मण के प्राणों को लेकर चिन्तित हैं। वे बारम्बार लक्ष्मण से आँखें खोलने को कहते हैं, मुख से कुछ बोलने को कहते हैं। राम बार बार पूछते हैं कि हनुमान अभी तक पहुँचे क्यों नहीं हैं। प्रतीक्षा की घड़ियाँ खत्म होती हैं। हनुमान सूर्योदय से पहले लक्ष्मण के प्राण के रूप में संजीवनी बूटी लेकर पहुँच जाते हैं। सुषेण वैद्य दिव्य वनस्पति की स्तुति कर लक्ष्मण को ठीक करने के लिये संजीवनी प्राप्त करते हैं और उसके रस से लक्ष्मण की मूर्च्छा दूर करते हैं। लक्ष्मण चेतना में आते ही मेघनाद को ललकारते हैं।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Angada - अंगद

अंगद एक प्रमुख चरित्र हैं, जो भगवान राम के आनुयाई, सुग्रीव के बेटे, और हनुमान जी के परम मित्र हैं। वह वानर समुदाय के एक प्रतिष्ठित सदस्य हैं और उनकी शक्तियों, साहस और निष्ठा के कारण मशहूर हैं। अंगद ने अपनी पूर्वजों के तरह अपनी मातृभूमि की सेवा करने का संकल्प लिया हैं और उन्होंने अपनी महानता और समर्पण के कारण रामायण काव्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।

अंगद का वर्णन करते समय, उनका आकार मध्यम है और वह बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली दिखते हैं। उनके शरीर का रंग भूरा होता हैं, जिसे सुनहरे रंग के बालों से ढंका हुआ होता हैं। उनके प्रत्येक अंग से प्रकट होने वाली तेज़ और ऊर्जा उनकी शक्तियों का प्रतीक हैं। वे मानसिक तथा शारीरिक रूप से बहुत ही आक्रामक, वीरतापूर्ण और निर्भय होते हैं। उनकी नेत्रों में न्याय और सत्य की ज्योति दिखती हैं, और वे सभी को उनकी भक्ति और सेवा में अपना मार्ग प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

अंगद बहुत ही विनीत और समझदार होते हैं, और वे अपने पिता सुग्रीव की उपासना और सेवा करते हैं। उनकी आदर्शवादी और धर्मप्रिय प्रवृत्ति उन्हें एक नेतृत्वी व्यक्ति बनाती हैं। वे भगवान राम के विश्वासपूर्ण साथी हैं और उनके द्वारा विचार और विदेशी विवेक के प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त करते हैं। उनके आक्रामक और युद्ध नीति ज्ञान ने उन्हें महारथी के रूप में अविश्वसनीय बना दिया हैं।

अंगद ने राम के द्वारा वानर समुदाय के साथ जुड़ने के उपाय को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। उन्होंने भीमसेन, जम्बवान और नल-नील के साथ मिलकर रामायण के प्रमुख युद्धों में भाग लिया हैं। उनकी उम्दा योग्यता, साहस और उद्यमशीलता ने उन्हें राम के लिए अनमोल योगदान दिया हैं।

अंगद की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक उनकी पिता की मुक्ति की कथा हैं। जब राम और लक्ष्मण सुग्रीव के पास आए तो अंगद ने अपने पिता की रक्षा के लिए उत्साहित होकर सबसे पहले आगे बढ़ाई थी। वे हनुमान के साथ मिलकर सिंहासन पर चढ़े और लंका के राजा रावण के सामरिक दरबार में पहुंचे। अंगद ने राम के संदेश को देकर अपनी महानता का परिचय दिया और उनके साथीदारों के लिए सुग्रीव की मुक्ति की मांग की। उनकी प्रतापशाली और प्रभावशाली भाषण ने रावण को चुनौती दी और सुग्रीव को छूट मिली।

अंगद धर्मप्रियता, साहस, वीरता और अनुशासन में प्रमुख हैं। वे अपनी दृढ़ता और स्वाभिमान के लिए प्रसिद्ध हैं और अपने परिवार, समुदाय और धर्म के प्रति वचनबद्ध हैं। अंगद का चरित्र रामायण के अन्य महान कार्यकर्ताओं की तुलना में अद्वितीय हैं, और उनके महान योगदान ने उन्हें एक योग्य और श्रेष्ठ चरित्र के रूप में प्रतिष्ठित किया हैं।

अंगद वानर समुदाय के एक प्रमुख नेता के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। उनकी अनोखी गुणवत्ता, बुद्धिमता और धैर्य की वजह से वे सभी के द्वारा सम्मानित हैं। अंगद के चरित्र ने हमें सामरिक योद्धा, उत्कृष्ट नेता और धार्मिक व्यक्ति के मानवीय गुणों का आदर्श प्रदान किया हैं। उनकी भक्ति और सेवा ने उन्हें भगवान राम की अत्युत्कृष्ट सेवा करने का अद्वितीय अवसर प्रदान किया हैं।



Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Sanskrit shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Hindi shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner English shlok

|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

ram mandir ayodhya news feed banner
2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

ram mandir ayodhya news feed banner
रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

ram mandir ayodhya news feed banner
अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.