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श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
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The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : हनुमान का सुषेण वैद्य को लाना। संजीवनी बूटी लेने हिमालय पर्वत जाना।

रामायण : Episode 68

हनुमान का सुषेण वैद्य को लाना। संजीवनी बूटी लेने हिमालय पर्वत जाना।

अशोक वाटिका में सीता को विश्वास नहीं होता है कि लक्ष्मण को शक्ति लगी है। वे जानती हैं कि लक्ष्मण को कुछ हुआ तो उनके पति राम के प्राण भी नहीं बचेंगे। लक्ष्मण का सिर गोद में रखकर बैठे राम के अश्रु रुक नहीं रहे। विभीषण, सुग्रीव और जामवन्त सभी लक्ष्मण की हृदयगति धीमी पड़ते जाने से सारी आशाएं त्याग देते हैं। हनुमान पूछते हैं कि क्या वास्तव में अब कोई उपाय बाकी नहीं बचा है। विभीषण कहते हैं कि लंका की वनस्पति उपवन प्रयोगशाला में रहने वाले वैद्यराज सुषेण लक्ष्मण का उपचार कर सकते हैं किन्तु उन्हें वहाँ से लाना असम्भव है। इस असम्भव को सम्भव करने के लिये हनुमान लंका में जाते हैं और वैद्य सुषेण को उसके भवन सहित उठा लाते हैं। सुषेण अपने देश के शत्रु यानि लक्ष्मण का उपचार करने से इनकार कर देते हैं। तब विभीषण उनसे कहते हैं कि देशभक्ति से ऊपर वैद्य का शाश्वत धर्म रोगी की पीड़ा हरना है। सुषेण लक्ष्मण का नारी परीक्षण करते हैं। वे कहते हैं कि यदि लक्ष्मण को जीवित बचाना है तो सूर्योदय से पहले हिमालय पर्वत से मृतसंजीवनी बटी लानी होगी। सुषेण बूटी की पहचान बताते हैं कि इनमें दिव्य प्रकाश होता है। इसकी सुरक्षा देवता करते हैं। यदि कोई इनके निकट जाते हैं तो यह विलोपित हो जाती हैं। राम अल्प अवधि में हिमालय जाना और आना असम्भव मानते हैं किन्तु हनुमान उनसे आज्ञा लेकर आकाश मार्ग से हिमालय की ओर प्रस्थान करते हैं। उधर रावण को अपने गुप्तचर शूक से सूचना मिलती है कि वैद्य सुषेण की बतायी बूटी लेने हनुमान हिमालय गये हैं। रावण मायावी असुर कालनेमि को हनुमान की यात्रा बाधित करने की आज्ञा देता है। कालनेमि के पास द्रुतगति से कहीं भी पहुँचने की शक्ति है। वह अपनी माया से एक पर्वतीय सरोवर के निकट कुटिया का निर्माण करता है और साधु का वेश धारण करके राम नाम का जाप करने बैठ जाता है। हनुमान उसे कोई रामभक्त साधु समझकर वहाँ ठहरते हैं। कालनेमि हनुमान को अपना परिचय त्रिकालदर्शी साधु के रूप में देता है और कहता है कि उसे पता है कि वे सुषेण वैद्य के कहने पर लक्ष्मण के लिये संजीवनी बूटी लेने हिमालय पर जा रहे हैं। मायावी असुर कालनेमि हनुमान को विलम्बित करना चाहता है इसलिये वह कहता है कि यह प्रभु इच्छा है कि हनुमान यहाँ कुछ देर रुक कर विश्राम करें। वह यह भी कहता है कि हनुमान स्नान ध्यान करके आयें, वह अपने तपोबल से उन्हें कुछ ही पल में हिमालय की कन्दराओं में पहुँचा देगा। हनुमान धूर्त कालनेमि के जाल में फँस जाते हैं।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Lord Rama - भगवान राम

भगवान राम भारतीय मिथक और धर्मग्रंथों में एक महत्वपूर्ण चरित्र हैं। वे प्राचीन भारतीय काव्य महाकाव्य रामायण के मुख्य पात्र हैं और हिंदू धर्म में एक आदर्श पुरुष के रूप में पूजे जाते हैं। राम अयोध्या के सम्राट दशरथ के एकमात्र पुत्र थे और उनकी पत्नी का नाम सीता था। राम अपने जीवन के लिए न्याय, सत्य और धर्म के प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं।

राम ने अपने जीवन में अनेक महान कर्म किए। उनका प्रमुख कार्य रावण नामक राक्षस के प्रति युद्ध करना था। राम और उनके भक्त वानर सेना ने लंका पर आक्रमण किया और रावण को मार गिराया। इससे पहले राम ने अपनी पत्नी सीता को उसी द्वारा किये गए अपहरण के बाद छोड़ने के लिए खोजने का प्रयास किया।

राम के जीवन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू हैं, उनका वनवास। उन्हें पिता की अभियोग्य वचन सत्य करने के लिए 14 वर्षों तक वन में व्यतीत करना पड़ा। राम, सीता और उनके चहेते भाई लक्ष्मण ने अयोध्या को छोड़कर अज्ञातवास में रहते हुए वन में बहुत संघर्ष किया। उन्होंने वन में आश्रमों का निर्माण किया, राक्षसों से युद्ध किया और धर्म का पालन किया।

राम एक अत्यंत धैर्यशाली, उदार और सहनशील पुरुष थे। उन्होंने अपने दोस्तों, अनुयायियों, साधु-संतों, वानरों और गरीबों की सहायता की। राम का प्रमुख गुण संयम था और उन्होंने हमेशा सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का पालन किया। उन्होंने अपनी पत्नी सीता के प्रति वफादारी और प्रेम दिखाया और उन्हें उनकी प्राथमिकता के रूप में स्वीकारा।

रामायण में राम के साथ जुड़ी कई प्रमुख कथाएं हैं, जैसे की शबरी और सुग्रीव की मित्रता, हनुमान के वीरता, लक्ष्मण की समर्पण और रावण के वध की कथा। इन कथाओं के माध्यम से, राम ने अच्छाई, सत्य, उदारता, और न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

राम ने अपने जीवन में बहुत सारे परीक्षणों का सामना किया और सभी परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखा। उन्होंने धर्म का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों को पूरा किया और धर्म के लिए लड़ने के लिए अपनी शक्ति का सही उपयोग किया।

भगवान राम के जीवन के आदर्श और मूर्तिमान बने रहने के कारण, वे हिंदू धर्म में विशेष महत्त्व रखते हैं। उनके जीवन का अध्ययन नये पीढ़ी को आदर्श और मार्गदर्शन प्रदान करता है। उनकी वीरता, साहस, धैर्य, और न्यायप्रिय आचरण लोगों के मन में उन्हें सदैव याद रखने के लिए बना रखते हैं।

इस प्रकार, भगवान राम एक प्रमुख धार्मिक चरित्र हैं जो विभिन्न महान कार्यों के माध्यम से अद्वितीयता, साहस, और आदर्श दिखाते हैं। उनकी कथाएं और उनके आदर्शों का अनुसरण करने से हम सब एक उच्चतम और धार्मिक जीवन जी सकते हैं। रामायण के माध्यम से राम का चरित्र और उनके महान कर्म हमेशा हमारे साथ रहते हैं और हमें सत्य, न्याय, और परम धर्म की ओर प्रेरित करते हैं।



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|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

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2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

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रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

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अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.