×

जय श्री राम 🙏

सादर आमंत्रण

🕊 Exclusive First Look: Majestic Ram Mandir in Ayodhya Unveiled! 🕊

🕊 एक्सक्लूसिव फर्स्ट लुक: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का अनावरण! 🕊

YouTube Logo
श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
लाइव दर्शन | Live Darshan
×
YouTube Logo

Post Blog

The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : सीता की खोज। जटायु का अंतिम संस्कार। अशोक वाटिका में सीताजी

रामायण : Episode 33

सीता की खोज। जटायु का अंतिम संस्कार। अशोक वाटिका में सीताजी

राम और लक्ष्मण वन वन भटक कर सीता की खोज करते हैं। व्याकुल राम वन में हर पशु, पक्षी और भँवरों के समूहों से पूछते जाते हैं कि उन्होंने उनकी मृगनयनी सीता को कहीं देखा है। वन में राम को जटायु घायलावस्था में मिलते हैं। जटायु मरने से पहले राम को बताते हैं कि रावण सीता को आकाश मार्ग से दक्षिण दिशा की ओर ले गया है। जटायु रावण पर विजय पाने का आशीर्वाद देकर राम की गोद में अपने प्राण त्याग देते हैं। राम जटायु को पितातुल्य बताकर पुत्र भाँति उनका अन्तिम संस्कार करते हैं। उधर रावण सीता को लेकर लंका पहुँचता है और उन्हें अशोक वाटिका में राक्षसियों के पहरे में एक वृक्ष के नीचे रखता है। सीता रावण से कहती हैं कि उसने देवताओं को परास्त किया होगा किन्तु एक पवित्र सतीव्रता नारी के सत्यबल का सामना उसकी भ्रष्ट शक्तियाँ नहीं कर सकेंगी। उसका समूल नाश अवश्यंभावी है। सीता छलबल से उसका हरण करने के लिये रावण को धिक्कारती हैं। रावण सीता को जबरन अंगीकार करने के लिये आगे बढ़ता है। सीता घास के एक तिनके को तोड़ कर अपने और रावण के बीच रख देती हैं और धरती की परम सती नारी माता अनुसूइया को साक्षी मान कर कहती हैं कि एक सती नारी और परपुरूष के बीच एक तिनके की दीवार भी अभेद्य होती है, यदि रावण इस तिनके को लाँघने का दुस्साहस करेगा तो वो भस्म हो जायेगा। रावण अपने मद में सीता को बाल पकड़ कर घसीटते हुए ले जाने की बात कहता है और अपना हाथ आगे बढ़ाता है। तभी रावण को सावधान करते हुए आकाशवाणी होती है कि वो नलकुबेर के श्राप को याद करे। रावण को याद आता है कि उसने अपने सौतेले भाई नलकुबेर की पत्नी रंभा का बलपूर्वक शीलभंग किया था। तब नलकुबेर ने उसे श्राप दिया था कि यदि वह किसी परस्त्री की इच्छा के विरूद्ध उसका सतीत्व भंग करेगा तो उसके सिर के सात टुकड़े हो जायेंगे। रावण सीता की ओर बढ़ा अपना हाथ वापस खींच लेता है लेकिन दिखावा ऐसा करता है मानो वह प्रेमवश सीता के साथ जबरदस्ती नहीं कर रहा है। वह सीता को एक वर्ष का समय देता है कि वह स्वयं उसकी रानी बनना स्वीकार करें अथवा फिर उसके रसोईये सीता को काटकर उसका कलेवर तैयार करेंगे। रावण सीता का आत्मसमर्पण करवाने के लिये राक्षसियों को निर्देश देकर चला जाता है। राक्षसियाँ सीता को डराने का प्रयत्न करती हैं। अशोक वाटिका की मुख्य प्रहरी राक्षसी त्रिजटा उन्हें बाहर भेजकर सीता को सांत्वना देती हैं और उनके लिये सात्विक भोजन के प्रबन्ध का आश्वासन देती हैं। रावण की पटरानी मन्दोदरी एक अन्य रानी भैरवी को अपने नये राजसी वस्त्र देती है कि वह इन्हें सीता को भेंट करे। सीता मन्दोदरी की भेंट विनयपूर्वक अस्वीकार कर देती हैं और सन्देश भिजवाती है कि वे अपने पति रावण को समझाऐं अन्यथा उसका समूल नाश हो जायेगा। रावण मन्दोदरी के कक्ष में प्रवेश करता है। मन्दोदरी रावण से सीता को लंका के लिये अमंगलकारी बताकर राम के पास वापस भेजने की मांग करती है। रावण मन्दोदरी का तिरस्कार करता है।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Angada - अंगद

अंगद एक प्रमुख चरित्र हैं, जो भगवान राम के आनुयाई, सुग्रीव के बेटे, और हनुमान जी के परम मित्र हैं। वह वानर समुदाय के एक प्रतिष्ठित सदस्य हैं और उनकी शक्तियों, साहस और निष्ठा के कारण मशहूर हैं। अंगद ने अपनी पूर्वजों के तरह अपनी मातृभूमि की सेवा करने का संकल्प लिया हैं और उन्होंने अपनी महानता और समर्पण के कारण रामायण काव्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।

अंगद का वर्णन करते समय, उनका आकार मध्यम है और वह बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली दिखते हैं। उनके शरीर का रंग भूरा होता हैं, जिसे सुनहरे रंग के बालों से ढंका हुआ होता हैं। उनके प्रत्येक अंग से प्रकट होने वाली तेज़ और ऊर्जा उनकी शक्तियों का प्रतीक हैं। वे मानसिक तथा शारीरिक रूप से बहुत ही आक्रामक, वीरतापूर्ण और निर्भय होते हैं। उनकी नेत्रों में न्याय और सत्य की ज्योति दिखती हैं, और वे सभी को उनकी भक्ति और सेवा में अपना मार्ग प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

अंगद बहुत ही विनीत और समझदार होते हैं, और वे अपने पिता सुग्रीव की उपासना और सेवा करते हैं। उनकी आदर्शवादी और धर्मप्रिय प्रवृत्ति उन्हें एक नेतृत्वी व्यक्ति बनाती हैं। वे भगवान राम के विश्वासपूर्ण साथी हैं और उनके द्वारा विचार और विदेशी विवेक के प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त करते हैं। उनके आक्रामक और युद्ध नीति ज्ञान ने उन्हें महारथी के रूप में अविश्वसनीय बना दिया हैं।

अंगद ने राम के द्वारा वानर समुदाय के साथ जुड़ने के उपाय को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। उन्होंने भीमसेन, जम्बवान और नल-नील के साथ मिलकर रामायण के प्रमुख युद्धों में भाग लिया हैं। उनकी उम्दा योग्यता, साहस और उद्यमशीलता ने उन्हें राम के लिए अनमोल योगदान दिया हैं।

अंगद की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक उनकी पिता की मुक्ति की कथा हैं। जब राम और लक्ष्मण सुग्रीव के पास आए तो अंगद ने अपने पिता की रक्षा के लिए उत्साहित होकर सबसे पहले आगे बढ़ाई थी। वे हनुमान के साथ मिलकर सिंहासन पर चढ़े और लंका के राजा रावण के सामरिक दरबार में पहुंचे। अंगद ने राम के संदेश को देकर अपनी महानता का परिचय दिया और उनके साथीदारों के लिए सुग्रीव की मुक्ति की मांग की। उनकी प्रतापशाली और प्रभावशाली भाषण ने रावण को चुनौती दी और सुग्रीव को छूट मिली।

अंगद धर्मप्रियता, साहस, वीरता और अनुशासन में प्रमुख हैं। वे अपनी दृढ़ता और स्वाभिमान के लिए प्रसिद्ध हैं और अपने परिवार, समुदाय और धर्म के प्रति वचनबद्ध हैं। अंगद का चरित्र रामायण के अन्य महान कार्यकर्ताओं की तुलना में अद्वितीय हैं, और उनके महान योगदान ने उन्हें एक योग्य और श्रेष्ठ चरित्र के रूप में प्रतिष्ठित किया हैं।

अंगद वानर समुदाय के एक प्रमुख नेता के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। उनकी अनोखी गुणवत्ता, बुद्धिमता और धैर्य की वजह से वे सभी के द्वारा सम्मानित हैं। अंगद के चरित्र ने हमें सामरिक योद्धा, उत्कृष्ट नेता और धार्मिक व्यक्ति के मानवीय गुणों का आदर्श प्रदान किया हैं। उनकी भक्ति और सेवा ने उन्हें भगवान राम की अत्युत्कृष्ट सेवा करने का अद्वितीय अवसर प्रदान किया हैं।



Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Sanskrit shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Hindi shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner English shlok

|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

ram mandir ayodhya news feed banner
2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

ram mandir ayodhya news feed banner
रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

ram mandir ayodhya news feed banner
अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.